'महिलाओं पर भी गैंगरेप का आरोप लग सकता है, भले ही वे शारीरिक रूप से इसमें शामिल न रही हों': दिल्ली हाई कोर्ट

Oct 16, 2026 - 12:22
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'महिलाओं पर भी गैंगरेप का आरोप लग सकता है, भले ही वे शारीरिक रूप से इसमें शामिल न रही हों': दिल्ली हाई कोर्ट

यह फैसला तब आया जब कोर्ट एक ऐसी याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें एक महिला आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने को चुनौती दी गई थी। उस महिला पर आरोप था कि उसने लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ अपराध करने में पुरुषों की सक्रिय रूप से मदद की थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि यौन उत्पीड़न की कानूनी परिभाषा में पुरुष अपराधी शामिल होते हैं, इसलिए धारा 376D के तहत किसी महिला को गैंगरेप के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 376D में इस्तेमाल किए गए वाक्यांश "एक या अधिक व्यक्ति जो एक समान इरादे से काम करते हैं" का अर्थ उन सभी लोगों से है, जो अपराध करने में मदद करते हैं या उसमें शामिल होते हैं।

यह फैसला कानून की एक बड़ी खामी को दूर करता है, जिसका फायदा उठाकर पहले महिला सहयोगी गैंगरेप के आरोपों से बच जाती थीं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जो लोग पहले केवल साजिश रचने या कम गंभीर अपराधों के आरोपों से बच जाते थे, उन्हें अब कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। हाई कोर्ट ने कहा कि जो लोग गैंगरेप का हिस्सा बनते हैं—चाहे वे पीड़िता को पकड़कर रखते हों, निगरानी करते हों, या उसे बहला-फुसलाकर घटना स्थल तक लाते हों—वे भी उतने ही दोषी हैं।

यह फैसला इस बात का एक मजबूत उदाहरण है कि कोर्ट लिंग-आधारित अपराधों और 'समान इरादे' (common intention) की अवधारणा को किस तरह देखता है। भले ही मुख्य अपराध लिंग-आधारित हो, लेकिन गैंगरेप से जुड़े कानूनी प्रावधान मुख्य रूप से सामूहिक भागीदारी और आपराधिक साजिश को लक्षित करते हैं। हाई कोर्ट का यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि जो लोग जघन्य सामूहिक अपराधों की योजना बनाते हैं या उन्हें अंजाम देने में मदद करते हैं, वे तकनीकी बारीकियों की आड़ लेकर कानूनी कार्रवाई से नहीं बच सकते।

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